21 March 2012

Latest UPTET News : लखनऊ : उम्र विवाद में फंसे मंत्री राजा भैया

लखनऊ : अखिलेश यादव के मंत्रिमंडल में शामिल होने और फिर खाद्य के साथ जेल विभाग के मंत्री बनने के कारण पहले से ही चर्चा में आए बाहुबली छवि वाले रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया नए विवाद से घिरते जा रहे हैं। यह विवाद उनकी उम्र से जुड़ा है। 15 मार्च को मंत्री पद की शपथ लेने के बाद मीडिया को यह जानकारी दी गई कि वह केवल 38 वर्ष के हैं। खोजबीन के बाद पता चला कि यह मीडिया की चूक का नतीजा नहीं है, बल्कि खुद उन्होंने चुनाव लड़ते समय जो शपथ पत्र दिया है उसमें ही अपनी उम्र 38 वर्ष दर्ज की है। प्रतापगढ़ जिले के कुंडा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले राजा भैया 38 बरस के इसलिए नहीं हो सकते,
क्योंकि वह पहली बार 1993 में विधायक बने थे और विधायक-सांसद का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष है। यदि वह अभी 38 वर्ष के हैं तो फिर 1993 में वह 19 साल के ही रहे होंगे और संविधान 19 वर्ष की आयु के लोगों को चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं देता। अगर उन्होंने 25 वर्ष की उम्र में पहला चुनाव लड़ा था तो फिर अब उनकी आयु 44 वर्ष से कम नहीं होगी। 
सवाल यह उठ रहा है कि शपथ पत्र में उम्र संबंधी गलत जानकारी के लिए उन पर क्या कार्रवाई हो सकती है और यह कौन करेगा-सरकार या फिर चुनाव आयोग। शपथ पत्र में उम्र के बारे में गलत तथ्य का मामला सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि शपथ पत्र के अन्य विवरण सही हैं या नहीं? शपथ पत्र के मुताबिक उन पर हत्या के प्रयास, डकैती, अपहरण के आठ मामले हैं। उनके विरोधियों का दावा है कि उन पर इससे ज्यादा मामले हैं। अखिलेश पहले ही राजा भैया का यह कहकर बचाव कर चुके हैं कि उन पर सारे मामले पिछली सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से दर्ज कराए थे। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने भी मंगलवार को राजा भैया का बचाव करते हुए कहा, उन पर लगे आरोप राजनीतिक हैं। किसी भी व्यक्ति पर कोई भी आरोप लगा सकता है। उनके (मुलायम) ऊपर भी आरोप लगाए गए हैं। सपा मुखिया ने कहा, किसी भी अदालत ने राजा भैया को दोषी करार नहीं दिया है। उम्र विवाद पर उन्होंने कहा, वह अच्छा काम कर रहे हैं, जैसा एक युवा करता है। कांग्रेस ने मामले से किनारा करते हुए कहा कि यूपी में नई सरकार बनी है और उसे जमने का मौका मिलना चाहिए।

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